कल के बारिश के होंसले
अलग थे
मेरे भीगने के सपने भी
अलग थे
वोह तो आके
बरस के चली गयी
मगर मेरे भीगने के सपने
अधूरे रह गये
तेरे साथ वक्त गुजारनेके
लम्हे भी बहुत थे
मगर दास्तानोंके
किस्से ख़तम ही नहीं हुए
कल के बारिश के होंसले
अलग थे
मेरे भीगने के सपने भी
अलग थे
वोह तो आके
बरस के चली गयी
मगर मेरे भीगने के सपने
अधूरे रह गये
तेरे साथ वक्त गुजारनेके
लम्हे भी बहुत थे
मगर दास्तानोंके
किस्से ख़तम ही नहीं हुए
मेघ धन अंधारून
पक्षी तन शहारून
अंकुराच्या आशेपोटी
धरती होई व्याकूळ
कोसळेल मेघ फुटून
घरट जाईल वाहून
अंकुर उगवता उगवता
धरती जाई दुभंगून
तरी वाट ही तृषार्त
का चालती सारेजण
जणू आयुष्याची गाठ
गुंतता गुंतता जाते सुटून , जाते सुटून