Thursday, 23 January 2014

Tidal Zone

Life is like tidal zone
It has its high and low
we all are prone
to perish or live, no one know

water can be as high
head is down even you try
just stay below the sand cover
wait for the time to get it over

Shore can be very dry
exposure may reach the sky
just get encase in a shell
and you will survive well

Water will come and go
shore will stand and bow
I tell you, nature is so tall
it will prepare you for every fall.

Thursday, 31 October 2013

निशब्द

मला कळत नाही आहे
कि मी असा वेडा कसा झालो
सगळ्यांसारखे जगण्या ऐवजी
रोज प्रयत्न करून परत परत मेलो

तूच होतीस साक्षी ला
तरीही तुला परका झालो
तुझ्याच सोबतीने झोका घेण्या ऐवजी
हवेत उडी मारून वाऱ्यावर भिंगरी झालो

मला कळत नाही आहे
कि मी असा वेगळा कसा झालो
ना गाण्याचा सूर झालो , ना वाद्याचा ताल झालो
एका अक्रोशातला हरवलेला श्वास झालो

नाती हि होती अनेक साथी ला
तरीही त्यांना अनोळखी झालो
त्यांच्या सावलीत सुख मानण्या ऐवजी
आयुष्याच्या या वणव्यात एक ठिणगी झालो

मला कळत नाही आहे
कि मी असा कवी कसा झालो
अनेक शब्द होते , अनेक अर्थ होते
त्यातून नेमके निवडताना स्तब्ध झालो

श्रोते अनेक होते ऐकायला
तरी त्यांच्यासमोर मुका झालो
शब्दांचे खेळ खेळण्यापेक्षा ,
मी मात्र निशब्द झालो

Wednesday, 30 October 2013

जख्म

कल ही तो मिले थे , मगर ऐसा लग रहा है
कि सदिया बीत गयी, यांदे तो बहुत है
मगर खिले फूलोंके तरह मुरझा जाती है
दिन तेरा हुआ और रात अकेली है
क्या करू यादों से खुश मैं था ही नहीं कभी

रात तो रोज आती है , दिन भी रोज जाता है
फिर तुम क्यों नहीं रोज साथ होती हो ,
कभी कभी चमकनेवाले चाँद का वास्ता मत देना ,
तारोंसे नाता टूट जायेगा ,मेरा रिश्ता तो सूरज से है,
क्या करू तेरे सिवा जिंदगी मैं उजाला था ही नहीं कभी

मुरझाये फुलोंका वास्ता भी मत देना
फिर कलियों से नाता टूट जायेगा
कल के मिलने का किस्सा मत दोहराना
आज के न मिलने का जख्म गहरा हो जायेगा
क्या करू तेरे सिवा जिन्दा मैं था ही नहीं कभी

Sunday, 21 July 2013

अजब

आज कुछ अजब हो गया 
मेरा मन अबोल हो गया 
ना दोस्त चाहता हूँ 
ना दुश्मन चाहता हूँ 
बस 
अपने आप से 
 कहना  चाहता हूँ 

आज कुछ गजब हो गया 
मेरा दिल बेगाना  हो  गया 
ना सुर  चाहता हूँ 
ना बोल  चाहता हूँ 
बस 
अपने आप से 
गाना  चाहता हूँ 

आज कुछ अलग हो गया 
मेरा अहम् बेजान हो गया 
ना प्यार चाहता हूँ 
ना गम चाहता हूँ 
बस 
अपने आप से 
मिलना  चाहता हूँ 
मिलना  चाहता हूँ 

Sunday, 14 July 2013

सावली

रात्रीला घाबरलो अन दिवसामागे धावलो 
या जीवनाच्या शर्यतीत , स्वार्थामागे लागलो 
 डोंगर चढायच्या नादात 
नेहमीची पायरी  चुकली 
सूर्याकडे बघताना 
माझी सावली हरवली 
  
कसला प्रवास ,  कसले  लक्ष 
मी श्वापद , सगळे भक्ष 
नुसताच धावतोय  एकटा 
सोबत कधीच मारली 
सूर्याकडे  बघताना 
माझी सावली हरवली 

 माझेच मन , माझ्याच इच्छा 
 नात्याच्या या वाटा कच्या 
नवीन क्षितीजापायी 
पायाची माती सांडली 
सूर्याकडे बघताना 
माझी सावली हरवली 

 आज भूतकाळात फिरतोय 
काय काय गमावलं मोजतोय 
अनेक अनोळखी डोळ्यात 
माझी नावे शोधतोय 
सूर्याकडे बघताना 
माझी सावली हरवली 



 



 

Friday, 12 July 2013

जख्म

ये  जख्म जो पाए है हमने 

 उनका कोई  जवाब नहीं 

क्यों दिए है ये आपने 

इसका कोई सवाल नहीं 


कब और कहा 

ना  हमे है कोई खबर 

कब  और क्यों 

तुम भी हो बेखबर 


ये दर्द तो अब है साथ 

जैसे कबर पे   रोज नए फुल 

 मर भी गए तो अच्छा  होता 

पर हो गयी जिन्दा  रहने की भूल 




Tuesday, 18 June 2013

दुवा

कलम को रोका न गया 
 दिल को  थामा  न गया 
 ये है कुछ शब्दोंकी अदा 
ना  है इसमे कोई वादा 

बात है गुजरे वक्त की 
जब किसी की चाह थी 
ओठोंपे भी कुछ आह थी 
जब होती थी नशा 
खाली  प्याले को  देखकर 
आंखोकी थी दशा 
उसकी राह  देखकर  


हाय , क्या कठोर दिल थी वही 
गुजरा  कल भी वही 
आज भी उसे चाहता हूँ 
दुवा उसी की  मांगता हूँ